किसान जागृति यात्रा का खरखौदा में जोरदार स्वागत।
खरखौदा :
कन्याकुमारी के छोर से शुरू होकर कश्मीर की बर्फीली वादियों तक का सफर तय करने वाली 'किसान जागृति यात्रा' सोनीपत जिले की खरखौदा अनाज मंडी पहुंची। किसानों के अधिकारों की अलख जगाने वाली इस यात्रा का स्थानीय किसानों और मंडी पदाधिकारियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया।
अनाज मंडी में ठहराव के बाद, रविवार सुबह भारी संख्या में किसानों के हुजूम के साथ यह यात्रा अपने अगले पड़ाव जींद के लिए रवाना हुई। आपको बता दे कि 7 फरवरी को कन्याकुमारी से शुरू हुई यह यात्रा देश के विभिन्न राज्यों से गुजरते हुए किसानों को एकजुट कर रही है। इस यात्रा का समापन 12 मार्च को कश्मीर में होगा, जिसके बाद दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल शक्ति प्रदर्शन की तैयारी है।
खरखौदा में एकत्रित किसानों को संबोधित करते हुए प्रख्यात किसान नेता जगजीत स ... View More
खरखौदा :
कन्याकुमारी के छोर से शुरू होकर कश्मीर की बर्फीली वादियों तक का सफर तय करने वाली 'किसान जागृति यात्रा' सोनीपत जिले की खरखौदा अनाज मंडी पहुंची। किसानों के अधिकारों की अलख जगाने वाली इस यात्रा का स्थानीय किसानों और मंडी पदाधिकारियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया।
अनाज मंडी में ठहराव के बाद, रविवार सुबह भारी संख्या में किसानों के हुजूम के साथ यह यात्रा अपने अगले पड़ाव जींद के लिए रवाना हुई। आपको बता दे कि 7 फरवरी को कन्याकुमारी से शुरू हुई यह यात्रा देश के विभिन्न राज्यों से गुजरते हुए किसानों को एकजुट कर रही है। इस यात्रा का समापन 12 मार्च को कश्मीर में होगा, जिसके बाद दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल शक्ति प्रदर्शन की तैयारी है।
खरखौदा में एकत्रित किसानों को संबोधित करते हुए प्रख्यात किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने देश की कृषि व्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज देश का अन्नदाता कर्ज के ऐसे दलदल में फंसा है, जिससे बाहर निकलना उसके लिए अकेले मुमकिन नहीं है। डल्लेवाल ने सुप्रीम कोर्ट के संदर्भों का हवाला देते हुए एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया। उन्होंने कहा, "यह बेहद दुखद है कि अब देश की सर्वोच्च अदालत भी मान चुकी है कि अब तक करीब चार लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं।
यह केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि चार लाख परिवारों की बर्बादी की दास्तां है।" उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते किसानों को इस आत्मघाती स्थिति से बाहर निकालने के लिए गंभीर कदम नहीं उठाए गए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी। किसान नेताओं ने आंकड़ों के जरिए यह समझाने की कोशिश की कि किसान कर्जदार क्यों है। डल्लेवाल ने दावा किया कि देश भर में फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दर पर होने के कारण किसानों को अब तक लगभग 111 लाख करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।
किसानों पर कुल कर्ज लगभग 26 से 28 लाख करोड़ रुपये है। यदि किसानों को उनकी फसल का उचित एमएसपी मिला होता, तो उनके पास कर्ज के मुकाबले कई गुना अधिक पैसा होता। अतः, एमएसपी की कानूनी गारंटी ही एकमात्र समाधान है ताकि कोई भी निजी खरीदार या सरकारी एजेंसी निर्धारित मूल्य से कम पर फसल न खरीद सके।
यात्रा के दौरान किसान नेताओं ने अपनी मांगों का मांग पत्र भी साझा किया। उनकी प्रमुख मांगों में डॉ. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना शामिल है। किसानों की मांग है कि फसलों का भाव सी2+50% (लागत का डेढ़ गुना) फार्मूले के आधार पर तय किया जाए। इसके अतिरिक्त, लैंड एक्विजिशन एक्ट-2013 (भूमि अधिग्रहण अधिनियम) को प्रभावी रूप से लागू करने पर जोर दिया गया।
नेताओं ने मांग की कि विकास परियोजनाओं के नाम पर किसानों की जमीनों का अधिग्रहण करते समय उन्हें मार्केट वैल्यू का चार गुना मुआवजा दिया जाना चाहिए, ताकि किसान विस्थापित होने के बाद अपना जीवन सम्मानजनक तरीके से जी सके। मंच से अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों पर भी सवाल उठाए गए। किसान नेताओं ने भारत और अमेरिका के बीच होने वाली प्रस्तावित कृषि डील को रद्द करने की पुरजोर मांग की।
उनका कहना है कि यदि विदेशी कृषि उत्पाद बिना किसी टैरिफ (आयात शुल्क) के भारतीय बाजारों में आएंगे, तो स्थानीय किसानों की फसलें कौड़ियों के दाम बिकेंगी। दूसरी ओर, भारतीय उत्पादों पर यदि विदेशों में भारी टैरिफ लगाया जाता है, तो हमारा निर्यात ठप हो जाएगा। यह असंतुलन भारतीय कृषि के लिए ताबूत में आखिरी कील साबित होगा।
किसान जागृति यात्रा का अगला चरण काफी महत्वपूर्ण है।
12 मार्च को कश्मीर में यात्रा के विधिवत समापन के बाद, सभी किसान संगठन 19 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में एकत्रित होंगे। वहां एक विशाल किसान महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान देश भर से जुटाए गए लाखों किसानों के हस्ताक्षर वाला मांग पत्र प्रधानमंत्री को सौंपा जाएगा, ताकि सरकार पर नीतिगत बदलाव के लिए दबाव बनाया जा सके।
खरखौदा पहुंचने पर यात्रा में जगजीत सिंह डल्लेवाल के साथ सुरेश पाटिल, अशोक कुमार, लीलाधर सिंह राजपूत, और युवा किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ जैसे प्रमुख चेहरे शामिल रहे। स्थानीय स्तर पर गोपालपुर के बेदी उर्फ वेदप्रकाश और खरखौदा मंडी प्रधान नरेश दहिया ने यात्रा के प्रबंधन और स्वागत में मुख्य भूमिका निभाई। किसान जागृति यात्रा केवल एक पदयात्रा नहीं, बल्कि भारतीय कृषि क्षेत्र में व्याप्त असंतोष का प्रतिबिंब है।
खरखौदा से जींद की ओर बढ़ते कदमों के साथ, किसानों का यह आंदोलन अब दिल्ली की दहलीज की ओर कूच कर रहा है। देखना यह होगा कि 19 मार्च की महापंचायत सरकार के रुख में क्या बदलाव लाती है। View Less